मलमास: ज्योतिष एवं आध्यात्मिकता का अद्भुत माह (malmas kya hai)

मलमास (Malmas), जिसे हम अधिक मास भी कहते हैं, हिंदू ज्योतिष और आध्यात्मिक परंपराओं में एक महत्वपूर्ण और रहस्यमयी माह माना जाता है। यह अतिरिक्त मास हमारे चांद्रिक कैलेंडर में उत्पन्न होता है और बारह महीनों की सामान्य श्रेणी के बाहर पड़ता है। इस लेख में, हम मलमास के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करेंगे और इसे ज्योतिष और आध्यात्मिकता के संदर्भ में समझेंगे।

अधिक मास (Malmas) की प्राकृतिक विशेषताएं

मलमास (Malmas) चांद्रिक और सौरिक पंचांगों को मिलाने के लिए एक संशोधन माह है। इसका कारण है कि चंद्रिक वर्ष में केवल 354 दिन होते हैं जबकि सौरिक वर्ष 365 दिनों का होता है। इस अतिरिक्त मास के दौरान, हिंदू ज्योतिष और पौराणिक कथाओं में कई मान्यताएं जुड़ी हैं। मलमास को शांति और स्नान के लिए उपयुक्त माना जाता है और इसके दौरान सत्कर्म और धर्मिक कार्यों का महत्व बढ़ जाता है।

मलमास का आध्यात्मिक महत्व

मलमास (Malmas) को आध्यात्मिकता के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह मास विशेष रूप से ध्यान, धार्मिक अभ्यास, और सेवा के लिए आवंटित होता है। इस समय पर्याप्त संयम और उच्च स्तर का आध्यात्मिक जागरण अपनाने की सलाह दी जाती है। संतों, महात्माओं, और आध्यात्मिक गुरुओं की संदेशों को सुनने और उनका अनुसरण करने का भी विशेष महत्व होता है।

शुभ और अशुभ कार्यों की परंपरा

मलमास को अशुभ मास माना जाता है और इसके दौरान शादी, गृह प्रवेश, यात्रा, नया उद्योग आदि के शुभ कार्यों का आयोजन आमतौर पर नहीं किया जाता है। इसके बजाय, लोग इस मास में आध्यात्मिक साधनाओं, प्रार्थना, ध्यान और धर्मिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। अपने आपको शुद्ध रखने और धार्मिक सामर्थ्य को बढ़ाने का यह एक अच्छा अवसर होता है।

मलमास के विशेष पर्व और त्योहार

मलमास के दौरान कई विशेष पर्व और त्योहार मनाए जाते हैं। यहां कुछ प्रमुख पर्वों का उल्लेख किया जा सकता है, जैसे कि अष्टमी व्रत, हरिशयनी एकादशी, काजली तृतीया, रथ यात्रा, और तुलसी विवाह। ये पर्व और त्योहार मलमास की विशेषताओं और आध्यात्मिक महत्व को दिखाते हैं और लोग इनके माध्यम से अपनी आध्यात्मिक साधना को समृद्ध करते हैं।

ज्योतिष में मलमास (Malmas) का महत्त्व

ज्योतिष में मलमास का महत्त्व है क्योंकि यह माना जाता है कि इसका प्लेनेटरी स्थिति और ज्योतिषीय गणनाओं पर गहरा प्रभाव होता है। यह एक आध्यात्मिक चिन्तन और आत्म-विचार का समय माना जाता है। कई ज्योतिषियों का मानना है कि मलमास में महत्वपूर्ण निर्णय लेने या नए कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए, क्योंकि इसका संबंध अशुभता से होता है। इसके बजाय, आध्यात्मिक अभ्यास, ध्यान और ज्योतिषियों या आध्यात्मिक गुरुओं से मार्गदर्शन प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित करने की सिफारिश की जाती है।

मलमास रीति-रिवाज और उपासनाएं

मलमास में, भक्तगण आध्यात्मिक प्रगति की कामना से कई रीति-रिवाज और उपासनाएं करते हैं। कुछ सामान्य आचरणों में पवित्र स्थलों की यात्रा करना, नदियों में स्नान करना, देवताओं को समर्पित विशेष प्रार्थनाएं और धार्मिक रस्मों का पालन करना शामिल है। इन आचरणों का पालन करने से पवित्रता, आशीर्वाद और आध्यात्मिक विकास मिलने की उम्मीद होती है।

भक्तिपूर्ण अर्पण और दान

मलमास (Malmas) के दौरान, भक्तगण दान और स्वार्थहीन सेवा के कार्यों में लग जाते हैं। गरीबों को भोजन, कपड़े और अन्य आवश्यक सामग्री का दान करना शुभ माना जाता है। भक्तगण अक्सर सामुदायिक भंडारों, चारित्रिक यात्राओं और सेवा पर प्रयास करते हैं जिनसे उन्हें शुद्धि, आशीर्वाद और आध्यात्मिक विकास प्राप्त होता है।

मलमास हिन्दू ज्योतिष और आध्यात्मिकता में एक महत्त्वपूर्ण समय है जो हमें ध्यान, आध्यात्मिक साधना और सेवा में समर्पित होने का अवसर प्रदान करता है। यह अशुभ मास माना जाता है, लेकिन इसका आध्यात्मिक महत्त्व अत्यधिक प्रशंसनीय है। इस मास में अपने आपको शुद्ध रखकर आध्यात्मिक अभ्यासों पर ध्यान केंद्रित करना और आध्यात्मिक विकास का मार्ग अपनाना आवश्यक होता है।

अक्सर पूंछे जाने वाले सवाल

मलमास कब से कब तक है 2023

मलमास (Malmas) मंगलवार, 18 जुलाई, 2023 से शुरू होकर बुध, 16 अगस्त, 2023 तक रहेगा।

मलमास में वर्जित कार्य

मलमास में सभी मांगलिक कार्य जैसे शादी-विवाह, उपनयन संस्कार, मुंडन संस्कार आदि करना वर्जित माना जाता है।

मलमास में व्रत

अधिकमास या मलमास में कई लोग पूरे माह का उपवास रखते हैं और नियमों का ध्यान रखते हैं। जबकि कई लोग सोमवार व्रत का उपवास रखते हैं।

मलमास में जन्मे बच्चे कैसे होते हैं?

मलमास (Malmas) जिसे की अधिक मास के नाम से भी जाना जाता है। मलमास में जन्म लेने वाले लोग स्वतंत्र और दृढ़ इच्छाशक्तिवाले होते हैं, यही कारण है की हर जगह ये आगे रहते हैं। इन्हें किसी से भी दबकर रहना पसंद नहीं होता है, ये निडर होते हैं। ये अपनी राहें खुद बनाते हैं।

मलमास में क्या करना चाहिए?

मलमास में श्रीमद्भगवद्गीता और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए। इस मास में कोई भी मांगलिक कार्यक्रम नहीं किए जाते। और साथ ही इस मास में कोई संक्रांति भी नहीं आती है।

मलमास में क्या दान करना चाहिए?

मलमास के समय केले का दान करना चाहिए। अधिकमास में केला दान करने से घर में सकारात्मकता आती है। इसके साथ ही घर परिवार में प्रेम बढ़ता है।

अधिक मास की पंचमी तिथि कब है?

अधिकमास (Malmas) का समापन 16 अगस्त 2023, बुधवार के दिन होगा। अधिक मास होने के कारण इस बार सावन 59 दिनों का होगा। अधिक मास में पंचमी तिथि का विशेष महत्व है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 23 जुलाई 2023, रविवार के दिन पड़ रही है।

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