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Magh Mela 2023: क्या पुरुषों की तरह ही महिला नागा साधु भी रहती हैं निर्वस्त्र? बहुत रहस्यमयी दुनिया होती है इनकी

Magh Mela 2023: महिला नागा साध्वी को अक्सर कुंभ मेला के स्नान या अन्य किसी ऐसे ही खास अवसरों पर ही देखा जा सकता है। इनकी रहस्यमयी जिन्दगी की वजह से अक्सर लोगों को इनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती।

Women Naga Sadhu: महिला नागा साध्वी को अक्सर कुंभ मेला के स्नान या अन्य किसी ऐसे ही खास अवसरों पर ही देखा जा सकता है। इनकी रहस्यमयी जिन्दगी की वजह से अक्सर लोगों को इनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती। लेकिन जितना कम जानकारी इनके बारे में होती है लोग उतना ही इनके बारे में जानने को उत्सुक रहते हैं।

Pryagraj Magh Mela 2023: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में इन दिनों माघ मेला 2023 चल रहा है, ये माघ मेला आने वाली महाशिवरात्रि (18 फरवरी 2023) तक चलेगा। इस समय गंगा, जमुना और सरस्वती के संगम में स्नान करने को बहुत पवित्र माना जाता है। यही कारण है कि माघ के मेले में लाखों श्रद्धालु स्नान के लिए आते हैं। माघ
मेले में देशभर से तमाम साधु संत और अखाड़े के साधु भी स्नान करने के लिए आते हैं। लेकिन नागा साधु इन सब में आकर्षण का केंद्र होते हैं। पुरुषों की तरह ही महिला नागा साधु (साध्वी) भी होती है, जो अपना पूरा जीवन ईश्वर को समर्पित कर देती हैं।

महिला नागा साधु (साध्वी) को अक्सर कुंभ स्नान या अन्य किसी ऐसे ही खास अवसरों पर ही देखा जा सकता है। इसके बाद इनकी दुनिया एकदम अलग हो जाती है। इनकी इस रहस्यमयी जिन्दगी की वजह से ही अक्सर लोगों को इनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती। महिला नागा साधुओं का जीवन इतना सरल नहीं होता है।

उन्हें लगातार कड़ीतपस्या और ईश्वर की आराधना करनी पड़ती है। इनके बारे में लोगों को ज्यादा कुछ पता नहीं है। ये कहाँ से आती हैं, कहाँ जाएँगी या इनका रहने का स्थान और इनके रहन सहन के बारे जायदा किसी को कुछ पता नहीं होता है।

नागा साधु बनने की प्रक्रिया बहुत कठिन होती है

नागा साधु का जीवन
महिला नागा साधु

नागा साधु सिर्फ पुरुष ही नहीं होते बल्कि महिलाएं भी नागा साधु (साध्वी) बनती है। नागा साधु बनने के लिए पुरुषों की तरह महिलाओं को भी कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ता है। इसके नियम बहुत कठिन होते हैं। नागा साधु/साध्वी बनने के लिए महिलाओं की कठिन परीक्षा का दौर कई वर्षों तक चलता है।

नागा साधु बनने के लिए 10 से15 साल तक कठिन ब्रह्मचर्य जीवन का पालन करना होता है। इसके बाद उन्हें अपने गुरू को इस बात का यकीन दिलाना होता है कि अब उनका जीवन पूरी तरह से ईश्वर को समर्पित हो चुका है। इसके बाद ये खुद अपना जीते-जी पिंड दान करती हैं। इनका पूरा दिन ईश्वर की भक्ति में लीन होकर ही गुजरता है। अपना पिंड दान करने के बाद ही ये लोग साधु बनती हैं।

नागा साधु बनने के दौरान महिलाओं को अपने सिर का मुंडन करवाना पड़ता है, जिसके बाद उन्हें पवित्र नदी में स्नान करवाकर पूरे विधि-विधान के साथ नागा साधु बनाया जाता है।

क्या पुरुषों की तरह निवस्त्र रहती हैं महिला नागा साधु?

महिला नागा साधुओं की सुबह ईश्वर की आराधना से शुरू होती है। सभी साधु और साध्वियां उन्हें माता कहते हैं। उनका ओहदा बहुत ऊंचा होता है। नागा साधु दो तरह के होते हैं वस्त्रधारी और दिगंबर यानी निवस्त्र। ऐसे में क्या महिला नागा साधु भी निवस्त्र रहती है तो इसका जवाब है, नहीं। महिला नागा साधु निवस्त्र नहीं रहती
है। वो अपने शरीर पर एक गेरुआ रंग का वस्त्र धारण करती हैं। लेकिन ये कपड़ा सिला हुआ नहीं होना चाहिए। इस वस्त्र को गंती कहते हैं। इसके साथ ही उन्हें माथे पर तिलक लगाना बहुत जरूरी होती है।

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