Kalki Dham: कलयुग में कब और कहां जन्म लेंगे भगवान कल्कि?

Kalki Dham: सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु के 10 अवतार बताए जाते हैं। इन 10 अवतारों में से नौ अवतार हो चुके हैं, और 10वें अवतार यानि की भगवान कल्कि का अवतार अभी बाकी है। भगवन विष्णु 10वें अवतार के रूप में भगवान कल्कि के रूप में अवतार लेंगे, ऐसा मन जाता है कि, भगवान कल्कि कलयुग के अंत में सफेद घोड़े पर सवार होकर दुष्टों का संहार करेंगे।

Kalki Dham: कलयुग में कब और कहां जन्म लेंगे भगवान कल्कि?
Kalki Dham: कलयुग में कब और कहां जन्म लेंगे भगवान कल्कि?


Kalki Dham: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) आज उत्तर प्रदेश के संभल जिले में श्री कल्कि धाम मंदिर की आधारशिला रखेंगे। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार भगवान कल्कि विष्णु भगवान के दसवें अवतार हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार भगवन विष्णु के ९ अवतार हो चुके हैं, और कलियुग के अंत में उनका दसवां अवतार भगवान भगवान कल्कि के रूप में होगा। ऐसा माना जाता है कि जब कलियुग का अंत होने वाला होगा तब भगवान विष्णु अपना दसवां अवतार लेंगे और सफ़ेद घोड़े पर बैठ कर दुष्टों का संहार करेंगे।

कल्कि धाम कहां है?

कल्कि धाम उत्तर प्रदेश के संभल जिले है। ऐसा माना जाता है कि इसी स्थान पर भगवान कल्कि अपना अवतार लेंगे, इसलिए यहां पर उनका मंदिर भी बनाया जा रहा है।

इस स्थान पर होगा जन्म

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवन कल्कि का अवतरण सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को संभल नामक स्थान पर विष्णुयशा नाम के एक ब्राह्मण परिवार में होगा। भगवान कल्कि जिनके घर अवतार लेंगे वे वसुदेव जी (भगवान कृष्ण के पिता) की तरह भगवान विष्णु के परम भक्त होंगे। इसके साथ ही वह वेदों और पुराणों के भी ज्ञाता होंगे। भगवान कल्कि सफेद घोड़े पर सवार होकर पापियों का नाश करके एकबार फिर से धर्म की रक्षा करेंगे।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु के दसवें अवतार कल्कि के अवतार लेते ही सतयुग का प्रारंभ और कलियुग का अन्त होगा। कलियुग की शुरुआत 3102 ईसा पूर्व से हो चुका है, कलियुग का अभी प्रथम चरण चल रहा है। ऐसी मान्यता है कि कलियुग 4 लाख 32 हजार वर्षों का होगा, जिसमें से अबतक कलियुग के 5126 वर्ष बीत चुके हैं, और 426875 वर्ष अभी बाकी हैं। इसलिए मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु का कल्कि अवतार होने में अभी करीब 426875 वर्ष बाकी हैं।

Kalki Avatar

भगवान कल्कि के अवतरण का उद्देश्य क्या है?

मान्यताओं के अनुसार आगे आने वाले समय में कलयुग जैसे - जैसे बीतेगा धरती पर पृथ्वी पर अत्याचार और पाप बढ़ता जाएगा। लोगों में संस्कारों की कमी होगी, शिष्य गुरु के उपदेशों का पालन नहीं करेंगे, लालच और भोग विलाश में लोग लिप्त रहने लगेंगे, हत्या और लूट की घटनाएं बढ़ जाएंगी और धर्म की नीतियां खत्म हो जाएंगी, तब भगवान कल्कि अधर्म का नाश करने के लिए और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए अवतरित होंगे।

क्या बाबर ने तुड़वाया था कल्कि मंदिर?

इतिहासकारों के अनुसार बाबर (Babur) ने पानीपत की पहली लड़ाई में इब्राहिम लोदी पर जब अपनी जीत हासिल की तब इस तारीख की याद में वहां काबुली बाग मस्जिद का निर्माण कराया था। बाबर ने इस मस्जिद का नाम अपनी पत्नी काबुली बेगम के नाम पर रखा था। ठीक इसी प्रकार से बाबर ने अयोध्या में राम मंदिर को तोड़कर वहां बाबरी मस्जिद बनवाया था। और तीसरी मस्जिद संभल में बनवाया गया था।

उत्तर प्रदेश के संभल में जिस जगह शाही जामा मस्जिद का निर्माण करवाया गया, वहां पर पहले कभी भगवान कल्कि का मंदिर (Kalki Mandir) हुआ करता था। इतिहासकारों के अनुसार 1528 में बाबर के आदेश पर उसके वफादार मीर बेग ने कल्कि मंदिर को पूरी तरह से नष्ट करने के बाद मंदिर के अवशेष पर ही मस्जिद का निर्माण कराया था। आज भी कल्कि मंदिर की दीवारों पर और दूसरी चीजों पर मंदिर के अवशेष नजर आते हैं।

संभल का अयोध्या से क्या कनेक्शन है?

कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम (Acharya Pramod Krishnam) ने संभल में भव्य कल्कि मंदिर बनवाने का संकल्प लिया था। अब कल्कि पीठ के द्वारा मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है। संभल में बन रहे कल्कि मंदिर और अयोध्या राम मंदिर (Ram Mandir) के बीच कई समानताएं हैं।

  • कल्कि मंदिर का निर्माण भी उसी गुलाबी पत्थरों से होगा जिस पत्थर से अयोध्या में रामलला के मंदिर का निर्माण हुआ है।
  • भगवान कल्कि का मंदिर काफी भव्य होगा, कल्कि मंदिर का विस्तार 5 एकड़ में फैला होगा।
  • मंदिर के शिखर की ऊंचाई 108 फीट होगी और इसके साथ ही 11 फीट की ऊंचाई पर मंदिर का चबूतरा बनेगा।

श्रीमद्भागवत गीता में क्या बताया गया है?

श्रीमद्भागवत गीता के 12वें स्कंद में भी भगवान विष्णु के कल्कि अवतार का वर्णन है। गीता में बताया गया है कि, कलयुग के अंत में और सतयुग के प्रारंभ में भगवान विष्णु कल्कि के रूप में अवतार लेंगे। यहाँ पर यह भी बताया गया है कि, जब गुरु, सूर्य और चंद्रमा एक साथ पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, तब भगवान कल्कि का विष्णुयशा नामक ब्राह्मण परिवार के घर में जन्म होगा। वह सफेद घोड़े पर सवार होंगे और 64 कलाओं से युक्त होंगे। श्रीमद्भागवत के 12वें स्कंद में लिखा है-

शम्भल ग्राम मुख्यस्य ब्राह्मणस्य महात्मनः।

भवने विष्णुयशसः कल्किः प्रादुर्भविष्यति॥